प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार और यूपीसीडा CEO बलकार सिंह के सामने रखीं औद्योगिक क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं
हैलो हिन्द
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार को गति देने के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग को लेकर इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA) ने शासन और औद्योगिक विकास प्राधिकरण के स्तर पर जोरदार पैरवी की। IEA के अध्यक्ष संजीव शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने अपर मुख्य सचिव, MSME आलोक कुमार, आईएएस तथा UPSIDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी बलकार सिंह से मुलाकात कर गौतमबुद्ध नगर, ग्रेटर नोएडा और यमुना औद्योगिक क्षेत्र समेत प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल में पीके तिवारी, एमपी शुक्ला, विवेक चौहान, लक्ष्मण प्रसाद एवं महिपाल सिंह चौहान शामिल रहे।

ई-ऑक्शन नहीं, छोटे भूखंडों का हो ड्रॉ से आवंटन
IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि छोटे और वास्तविक उद्यमियों के लिए औद्योगिक भूखंड हासिल करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। 2,000 वर्गमीटर तक के औद्योगिक भूखंडों का आवंटन ई-ऑक्शन के बजाय ड्रॉ/लॉटरी के माध्यम से किया जाए। साथ ही पांच वर्ष से अधिक समय से किराये के परिसरों में उद्योग चला रहे उद्यमियों को प्राथमिकता देने की मांग की गई। औद्योगिक विकास केवल भूखंड आवंटित करने से नहीं होगा, बल्कि सड़क, पानी, ड्रेनेज, बिजली, सीवर और परिवहन जैसी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

यमुना औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाओं की मांग
YEIDA क्षेत्र में Functional Certificate के लिए 50 प्रतिशत RCC निर्माण की अनिवार्यता को उद्योग की प्रकृति के अनुरूप व्यावहारिक बनाने की मांग की गई। IEA ने कहा कि अलग-अलग प्रकार के उद्योगों पर एक जैसी निर्माण शर्तें लागू करना व्यावहारिक नहीं है। यमुना औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी, बिजली और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं जल्द विकसित करने तथा इकाइयों की कार्यशीलता की अवधि बढ़ाने की मांग भी रखी गई, ताकि आधारभूत सुविधाएं पूरी तरह विकसित होने से पहले उद्यमियों पर आर्थिक दंड का बोझ न पड़े।

यूपीसीडा CEO के सामने भी उठीं बड़ी मांगें
CEO बलकार सिंह के समक्ष IEA ने औद्योगिक भूखंडों और प्राधिकरण से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग रखी। संगठन ने दो हजार वर्गमीटर तक के भूखंडों का आवंटन ड्रॉ/लॉटरी से करने, पूर्ण भुगतान के बाद रजिस्ट्री से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराने तथा Rent Permission और 1,000 वर्गमीटर तक के भूखंडों के ट्रांसफर की अनुमति रीजनल ऑफिस स्तर पर देने की मांग की। गौतमबुद्ध नगर में औद्योगिक भूमि की ऊंची लागत को देखते हुए FAR और Ground Coverage बढ़ाने, सभी औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति एवं सीवर लाइन सुनिश्चित करने तथा औद्योगिक क्षेत्रों में सेंट्रलाइज ETP स्थापित करने का मुद्दा भी उठाया गया।
“उद्योग बढ़ेगा तो निवेश और रोजगार भी बढ़ेगा”
IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि ये समस्याएं केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं नहीं हैं, बल्कि सीधे तौर पर उद्योगों की स्थापना, निवेश, उत्पादन और रोजगार से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों को सुविधाजनक एवं समयबद्ध प्रशासनिक व्यवस्था के साथ मजबूत आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी, तभी उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार सृजन को और गति मिलेगी।

IEA की प्रमुख मांगें:-
- 2,000 वर्गमीटर तक भूखंडों का आवंटन ड्रॉ/लॉटरी से हो।
- 50 KW से बढ़ाकर 100 KW हो LT कनेक्शन की सीमा।
- बिना जल कनेक्शन के जारी बिलों का विशेष कैंप में निस्तारण।
- YEIDA में Functional Certificate की 50% RCC शर्त व्यावहारिक बने।
- यमुना क्षेत्र में सड़क, ड्रेनेज, बिजली, पानी और परिवहन सुविधाएं जल्द विकसित हों।
- लंबित MSME सब्सिडी का समयबद्ध भुगतान हो।
- गौतमबुद्ध नगर में Export Promotion Centre बने।
- औद्योगिक सेक्टरों में जरूरत के अनुसार Fire Station स्थापित हों।
- GNIDA की पुरानी देनदारियों के लिए OTS लागू हो।
- UPSIDA में Water Supply, Sewer Line और Centralized ETP की व्यवस्था हो।
- Mortgage/PTM Permission की प्रक्रिया अधिकतम 7 दिन में पूरी हो।
- गौतमबुद्ध नगर में FAR और Ground Coverage बढ़ाया जाए।


