IIAF और श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के बीच समझौता; युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप, कर्मचारियों को नौकरी के साथ डिग्री-डिप्लोमा का अवसर
हैलो हिन्द
फरीदाबाद। औद्योगिक क्षेत्र में कुशल कामगारों की कमी दूर करने और युवाओं व कार्यरत कर्मचारियों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में आईएमटी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन फरीदाबाद (IIAF) ने महत्वपूर्ण पहल की है। एसोसिएशन ने श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय (SVSU), हरियाणा के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत उद्योग और शिक्षा जगत के बीच तालमेल बढ़ाने के साथ युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और कार्यरत कर्मचारियों को नौकरी के साथ उच्च शिक्षा हासिल करने के अवसर दिए जाएंगे।

रोजगार पोर्टल बनेगा युवाओं और उद्योगों के बीच सेतु
समझौते के तहत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को IIAF रोजगार पोर्टल (iiafjobs.com) से जोड़ा जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी पोर्टल पर अपना विवरण दर्ज कर सकेंगे। इसके माध्यम से आईएमटी की सदस्य औद्योगिक इकाइयां अपनी जरूरत के अनुसार योग्य एवं प्रशिक्षित युवाओं से सीधे जुड़ सकेंगी। युवाओं को रोजगार, प्रशिक्षुता और इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी दोनों संस्थाएं मिलकर काम करेंगी।

नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं, साथ में पढ़ाई भी
समझौते की सबसे खास पहल कार्यरत कर्मचारियों के लिए है। आईएमटी की औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले कर्मचारी नौकरी करते हुए अपनी शैक्षिक योग्यता और तकनीकी कौशल बढ़ा सकेंगे। डिप्लोमा, डिग्री, एमबीए अथवा प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम करने के इच्छुक कर्मचारियों के लिए आईआईएएफ और विश्वविद्यालय मिलकर आईएमटी में विश्वविद्यालय के शिक्षकों के माध्यम से कक्षाएं संचालित करने अथवा ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे। कर्मचारियों की जरूरत के आधार पर नए पाठ्यक्रम और तकनीकी ट्रेड शुरू करने की योजना भी बनाई जाएगी।

उद्योग की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण
औद्योगिक इकाइयों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उद्योग आधारित पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। फिटर, इलेक्ट्रीशियन, टर्नर और वेल्डर जैसे तकनीकी ट्रेड में प्रशिक्षुता और तकनीकी प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। विद्यार्थियों को आईएमटी की सदस्य औद्योगिक इकाइयों में काम सीखने, औद्योगिक भ्रमण, इंटर्नशिप और प्रशिक्षुता के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।

रोजगार मेले और परिसर में चयन की व्यवस्था
आईआईएएफ और श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से रोजगार मेले, प्रशिक्षुता अभियान और परिसर चयन कार्यक्रम आयोजित करेंगे। वहीं औद्योगिक इकाइयों के अनुभवी विशेषज्ञों को विश्वविद्यालय में अतिथि शिक्षक, प्रशिक्षक और मूल्यांकनकर्ता के रूप में जोड़ा जाएगा। कार्यशालाएं, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रबंधन विकास कार्यक्रम, संगोष्ठियां, कौशल प्रतियोगिताएं और प्रमाणपत्र कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
आईएमटी में खुलेगा कौशल विकास केंद्र
भविष्य में आईएमटी में उत्कृष्टता केंद्र, कौशल प्रयोगशालाएं और प्रदर्शन केंद्र विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इसके साथ ही हरियाणा सरकार के सहयोग से आईएमटी फरीदाबाद में कौशल विकास केंद्र स्थापित एवं संचालित करने का प्रयास किया जाएगा। इस केंद्र के माध्यम से युवाओं और कर्मचारियों के लिए कौशल विकास, नए कौशल सीखने, पुराने कौशल को बेहतर बनाने, प्रशिक्षुता और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा सकेंगे।
स्टार्टअप और नए प्रयोगों को भी मिलेगा मंच
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को आईएमटी औद्योगिक प्रदर्शनी और अन्य औद्योगिक आयोजनों में अपने नवाचार, नमूना उत्पाद और नए कारोबारी विचार प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। आईआईएएफ ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उद्योगों से जोड़ने, मार्गदर्शन दिलाने और संभावित निवेशकों तक पहुंच बनाने में सहयोग करेगा।
उद्योगों को कुशल कर्मचारी, कर्मचारियों को तरक्की का अवसर
आईआईएएफ के अध्यक्ष प्रमोद राणा ने कहा कि यह समझौता आईएमटी को केवल एक बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे कौशल, रोजगार और उद्योग-शिक्षा के तालमेल का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आज उद्योगों के सामने कुशल जनशक्ति की उपलब्धता बड़ी चुनौती है। इस पहल से एक ओर उद्योगों को अपनी जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित एवं कुशल कर्मचारी मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर युवाओं और वर्तमान कर्मचारियों को अपनी योग्यता, कौशल और रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने आईएमटी की सभी सदस्य औद्योगिक इकाइयों से अपील की कि जिन कर्मचारियों की रुचि कौशल विकास, डिप्लोमा, डिग्री, एमबीए अथवा किसी प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम में है, वे आईआईएएफ से संपर्क करें। इच्छुक कर्मचारियों की सूची तैयार कर विश्वविद्यालय के साथ उनकी जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।


