हर हफ्ते महंगा हो रहा क्राफ्ट पेपर, बंदी की कगार पर कोरुगेटेड बॉक्स उद्योग
25–30% तक बढ़ी कच्चे माल की लागत, 7 दिन में भुगतान का दबाव; UPCBMA ने 20% तक बॉक्स कीमत बढ़ाने का किया ऐलान
हैलो हिन्द
नोएडा/ग्रेटर नोएडा। क्राफ्ट पेपर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने देशभर के कोरुगेटेड बॉक्स निर्माताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कच्चे माल की बढ़ती लागत, कार्यशील पूंजी की कमी और पेपर सप्लायर्स द्वारा भुगतान की अवधि घटाए जाने से हजारों एमएसएमई इकाइयों पर कारोबार बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। उत्तर प्रदेश कोरुगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (यूपीसीबीएमए) ने स्थिति को गंभीर बताते हुए तत्काल मूल्य संशोधन और जीएसटी व्यवस्था में हस्तक्षेप की मांग की है।
दो महीने से भी कम समय में लगातार बढ़े दाम
यूपीसीबीएमए के अनुसार, मानक क्राफ्ट पेपर की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। हाई बीएफ क्राफ्ट पेपर की कीमतों में भी उल्लेखनीय उछाल आया है। अगस्त और सितंबर के दौरान पेपर मिलों की ओर से लगातार साप्ताहिक मूल्य वृद्धि किए जाने से पहले से कम मार्जिन पर काम कर रहे कोरुगेटेड बॉक्स निर्माताओं पर लागत का दबाव और बढ़ गया है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष एसके चौहान ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि जीएसटी दरों में असमानता और कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि ने उद्योग के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। एसोसिएशन का दावा है कि इससे 30 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयों की व्यवहार्यता प्रभावित हो रही है।
30–60 दिन का उधार घटकर 7 दिन हुआ
कोरुगेटेड बॉक्स निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ कच्चे माल की कीमत नहीं, बल्कि कैश फ्लो भी बन गई है। एसोसिएशन के मुताबिक, पेपर सप्लायर्स पहले जहां 30 से 60 दिन तक का क्रेडिट देते थे, वहीं अब कई मामलों में सात दिन के भीतर भुगतान की मांग की जा रही है। दूसरी ओर, बॉक्स निर्माता अपने ग्राहकों से भुगतान में देरी का सामना कर रहे हैं। इससे खरीद और बिक्री के बीच नकदी का अंतर बढ़ रहा है और छोटी इकाइयों की कार्यशील पूंजी पर सीधा असर पड़ रहा है।
जीएसटी की दरों में अंतर से भी बढ़ी परेशानी
उद्योग की ओर से एक अन्य बड़ी समस्या इनवर्टेड जीएसटी स्ट्रक्चर को बताया गया है। एसोसिएशन के अनुसार, कोरुगेटेड पेपरबोर्ड बॉक्स पर जीएसटी दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने के बाद, क्राफ्ट पेपर जैसे प्रमुख कच्चे माल पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया। इनपुट और आउटपुट जीएसटी दरों के इस अंतर के कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) जमा होकर लंबे समय तक अटक जाता है, जिससे खासतौर पर छोटे निर्माताओं की कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है।

लागत संभालने के लिए बॉक्स के दाम बढ़ाने का फैसला
बढ़ती लागत के बीच यूपीसीबीएमए ने कार्टन बॉक्स की कीमतों में तत्काल 20 प्रतिशत तक वृद्धि का ऐलान किया है। एसोसिएशन के अनुसार, लागत की पूरी भरपाई के लिए 25 प्रतिशत तक वृद्धि पर विचार किया गया था, लेकिन डाउनस्ट्रीम उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव को देखते हुए फिलहाल 20 प्रतिशत वृद्धि का विकल्प चुना गया। कोरुगेटेड बॉक्स की मांग एफएमसीजी, वस्त्र एवं गारमेंट्स, ई-कॉमर्स, इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी है। ऐसे में बॉक्स की कीमतों में बदलाव का असर इन क्षेत्रों की पैकेजिंग लागत पर भी पड़ सकता है।
छोटी इकाइयों पर सबसे ज्यादा दबाव
उद्योग से जुड़े बाजार विश्लेषण के अनुसार, लगातार बढ़ती इनपुट लागत, सीमित तरलता और कम होती क्रेडिट अवधि से पैकेजिंग क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव की स्थिति बन सकती है। अपेक्षाकृत बड़े और एकीकृत कारोबारी बढ़ी हुई वित्तीय जरूरतों को संभाल सकते हैं, जबकि छोटे क्षेत्रीय कन्वर्टर्स के सामने परिचालन और नकदी प्रवाह से जुड़ी चुनौतियां अधिक गंभीर हो सकती हैं।
सरकार से जीएसटी दरों में समानता की मांग
यूपीसीबीएमए ने सरकार से क्राफ्ट पेपर और कोरुगेटेड बॉक्स पर जीएसटी दरों में समानता बहाल करने की अपील की है। साथ ही ग्राहकों से बॉक्स की कीमत को क्राफ्ट पेपर की लागत से जोड़कर देखने और निर्धारित समयसीमा में भुगतान करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि कच्चे माल की कीमतों, भुगतान चक्र और जीएसटी से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो छोटे एवं मध्यम निर्माताओं पर वित्तीय दबाव और बढ़ सकता है।
पैकेजिंग सप्लाई चेन की अहम कड़ी है उद्योग
कोरुगेटेड पैकेजिंग उद्योग देश की सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह एफएमसीजी, फार्मास्यूटिकल्स, ई-कॉमर्स और कृषि निर्यात सहित अनेक क्षेत्रों को पैकेजिंग उपलब्ध कराता है। उद्योग के अनुसार, यह क्षेत्र बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देता है और हर वर्ष बड़े पैमाने पर क्राफ्ट पेपर की खपत करता है।



