राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
छोटा उद्योग, बड़ी ताकत…
लघु उद्योगों से बनेगा विकसित भारत
लघु उद्योग भारती नोएडा इकाई के अध्यक्ष अमित कुमार सिंघल की कलम से…
हैलो हिन्द
यह केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि उन करोड़ों उद्यमियों, कारीगरों, श्रमिकों और परिवारों को सम्मान देने का अवसर है, जो अपने छोटे-छोटे उद्यमों के माध्यम से भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ी ताकत दे रहे हैं। आज जब भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इस यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में शामिल हैं।
लघु उद्योगों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये कम पूंजी में अधिक रोजगार पैदा करने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि कृषि के बाद रोजगार उपलब्ध कराने में एमएसएमई क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश के दूर-दराज के क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक छोटे उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों को गति दे रहे हैं।

एमएसएमई की ताकत, भारत की ताकत
एमएसएमई का योगदान केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। वर्ष 2022-23 में एमएसएमई क्षेत्र का जीवीए में योगदान लगभग 30.1 प्रतिशत रहा। वहीं देश के निर्यात में भी एमएसएमई की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत के आसपास रही है। वर्ष 2025-26 में ये आंकड़ा बढ़ा है। आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि यदि भारत को आत्मनिर्भर और विकसित अर्थव्यवस्था बनाना है तो एमएसएमई को मजबूत करना अनिवार्य है। विशेष रूप से नोएडा और एनसीआर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में एमएसएमई हजारों इकाइयों के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन से लेकर निर्यात तक छोटे उद्योगों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
सरकारी योजनाओं से बढ़ा भरोसा
सरकार ने पिछले वर्षों में एमएसएमई को मजबूती देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, पीएमईजीपी, स्फूर्ति, सीजीटीएमएसई, आरएएमपी, चैंपियंस पोर्टल और सार्वजनिक खरीद नीति जैसी पहल छोटे उद्यमियों को वित्त, प्रशिक्षण, तकनीक और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में नई उम्मीद पैदा की है। वहीं पीएमईजीपी ने नए उद्यम स्थापित करने के इच्छुक युवाओं को वित्तीय सहायता और सब्सिडी के माध्यम से स्वरोजगार का अवसर दिया है। सरकारी खरीद में एमएसई की भागीदारी बढ़ाने की नीति भी छोटे उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है।

चुनौतियां अभी भी बड़ी हैं
हालांकि एमएसएमई क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन छोटे उद्योगों के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। समय पर भुगतान, सस्ता और आसान ऋण, बिजली की लागत, अनुपालन का बोझ, कुशल श्रमिकों की उपलब्धता, तकनीकी उन्नयन और बाजार तक पहुंच आज भी प्रमुख मुद्दे हैं।
नोएडा के एमएसएमई की भूमिका और बढ़ सकती है
नोएडा आज देश के प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्रों में अपनी पहचान बना चुका है। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, गारमेंट्स, पैकेजिंग, आईटी और अनेक सेवा क्षेत्रों में एमएसएमई सक्रिय हैं।
यदि नोएडा के छोटे उद्योगों को बेहतर औद्योगिक आधारभूत ढांचा, सरल नियम, प्रतिस्पर्धी बिजली दर, आसान वित्त, कुशल मानव संसाधन और वैश्विक बाजार से बेहतर कनेक्टिविटी मिले, तो यह क्षेत्र देश के निर्यात और रोजगार में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।
छोटा उद्योग, बड़ा सपना
राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस हमें यह समझने का अवसर देता है कि छोटा उद्योग आकार में छोटा हो सकता है, लेकिन उसका सपना और योगदान बहुत बड़ा होता है। एक छोटी फैक्ट्री केवल मशीनों और उत्पादन का केंद्र नहीं होती, बल्कि उससे कई परिवारों की रोजी-रोटी, बच्चों की शिक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था जुड़ी होती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम एमएसएमई को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में न देखें, बल्कि उन्हें भारत की आर्थिक विकास यात्रा के साझेदार के रूप में देखें।


