उद्योगों की मजबूत आवाज बना IEA…

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संगठन ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए UPSIDA के समक्ष रखे 9 अहम सुझाव

सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र की जमीनी समस्याओं के साथ प्रशासनिक सुधारों पर हुई विस्तृत चर्चा

हैलो हिन्द 

ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं, कनेक्टिविटी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA) के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उद्योगों और हजारों कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले नौ प्रमुख विषयों को विस्तार से रखते हुए उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।

अध्यक्ष संजीव शर्मा का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई ऐसी समस्याएं हैं जो उद्योगों की कार्यक्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर रही हैं। यही कारण है कि उद्योग जगत ने एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं से लेकर प्रशासनिक सुधारों तक का व्यापक एजेंडा यूपीसीडा के सामने रखा है।

सबसे पहले एसोसिएशन ने औद्योगिक क्षेत्र में लगातार बिगड़ रही सफाई व्यवस्था का मुद्दा उठाया। पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले लगभग तीन महीनों से नालियों की नियमित सफाई नहीं हुई है और सड़कों के किनारे झाड़ू लगाने का कार्य भी प्रभावित है। इसके चलते कई स्थानों पर गंदगी, धूल और जल निकासी की समस्याएं बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर उद्योगों और कर्मचारियों पर पड़ रहा है।

बैठक में खराब स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि क्षेत्र की अनेक स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे रात के समय सुरक्षा और आवागमन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

औद्योगिक क्षेत्र की कनेक्टिविटी को लेकर भी IEA ने जोरदार पैरवी की। प्रतिनिधिमंडल ने साइट-बी क्षेत्र को बेहतर संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने के लिए खार लोहिया ड्रेन पर पुल निर्माण की पुरानी मांग को दोहराया। उद्योगपतियों का कहना है कि पुल बनने से न केवल यातायात सुगम होगा बल्कि परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आएगी, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को सीधा लाभ मिलेगा।

सूरजपुर के पार्कों की खराब स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई। एसोसिएशन ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के अधिकांश पार्क उपेक्षा का शिकार हैं। नियमित रखरखाव, हरियाली संरक्षण, वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण से क्षेत्र की छवि बेहतर होगी और एक सकारात्मक औद्योगिक वातावरण विकसित होगा। इसके साथ ही प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाने की मांग भी रखी गई ताकि स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिल सके।

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रशासनिक सुधारों से जुड़ा रहा। IEA ने किराया अनुमति (Rent Permission) की प्रक्रिया को क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय स्तर पर ही अनुमोदित किए जाने की मांग उठाई। उद्यमियों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में अनावश्यक विलंब होता है, जिससे उद्यमियों का समय और संसाधन दोनों प्रभावित होते हैं।

एसोसिएशन ने डीम्ड अप्रूवल व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने की भी मांग की। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर विभाग कोई आपत्ति दर्ज नहीं करता है तो आवेदन स्वतः स्वीकृत माना जाना चाहिए। साथ ही यदि कोई आपत्ति हो तो उसे एक ही बार में नियमों के स्पष्ट उल्लेख के साथ बताया जाए। बार-बार नई आपत्तियां लगाने की प्रक्रिया उद्योगों के लिए सबसे बड़ी प्रशासनिक बाधाओं में से एक बन चुकी है।

मेंटेनेंस चार्ज जमा करने की मौजूदा प्रक्रिया को भी उद्योग विरोधी बताते हुए इसे सरल बनाने की मांग की गई। IEA का कहना है कि शुल्क जमा करने से पहले विभागीय सत्यापन की अनिवार्यता अनावश्यक जटिलता पैदा करती है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए। इसके अलावा कंपनी के नाम अथवा स्वामित्व परिवर्तन से जुड़े मामलों का निस्तारण क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर ही किए जाने का सुझाव दिया गया ताकि उद्यमियों को छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया का सामना न करना पड़े।

संजीव शर्मा ने कहा कि यदि इन मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती है तो सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र की कार्यक्षमता बढ़ेगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और हजारों उद्योगों को सीधा लाभ पहुंचेगा। 

इस अवसर पर अध्यक्ष संजीव शर्मा के साथ पी.एस. मुखर्जी, प्रमोद झा, हरबीर सिंह, महिपाल सिंह, अनूप सिंह, हरीश सिंह सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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