उद्योग और सरकार के समन्वय से मजबूत होगा MSME सेक्टर

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कर्तव्य भवन में निर्यातकों ने रखीं समस्याएं, समाधान का मिला भरोसा

निर्यात संचालन, नीतिगत अड़चनें और लॉजिस्टिक्स लागत पर हुई गंभीर चर्चा

हैलो हिन्द 

नई दिल्ली। देश के एमएसएमई निर्यातकों को पेश आ रही समस्याओं और चुनौतियों को लेकर नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-3 में एमएसएमई मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्यात क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों ने समस्याओं को विस्तार से रखा।

बैठक में मंत्रालय के संयुक्त विकास आयुक्त दानिश अशरफ के साथ उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने विस्तृत चर्चा की। इस दौरान आर्या फैशन्स की संस्थापक एवं सीईओ तथा आईबीए की उपाध्यक्ष डॉ. खुशबू सिंह और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट राजीव बंसल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

निर्यातकों ने चुनौतियां से कराया अवगत 

बैठक में एमएसएमई निर्यातकों के सामने आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को प्रमुखता से उठाया गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि निर्यात प्रक्रिया में बढ़ती अनुपालन आवश्यकताएं, जटिल प्रक्रियाएं, लॉजिस्टिक्स लागत, दस्तावेजी औपचारिकताएं और नीतिगत अस्पष्टताएं एमएसएमई सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। प्रतिनिधियों ने सरकार से प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निर्यात सहायता तंत्र को मजबूत करने और निर्यातकों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी माहौल तैयार करने की मांग की।

मंत्रालय ने दिया सकारात्मक आश्वासन

संयुक्त विकास आयुक्त ने उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा रखे गए सुझावों और समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि मंत्रालय एमएसएमई निर्यात क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है और बैठक में उठाए गए बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी।

मंत्रालय का प्रयास सराहनीय : डॉ. खुशबू सिंह

डॉ. खुशबू सिंह ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व और सम्मान की बात है कि एमएसएमई मंत्रालय ने मुझे इस महत्वपूर्ण चर्चा में आमंत्रित किया। निर्यात क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों को मंत्रालय के समक्ष रखने का अवसर मिला। मंत्रालय का यह प्रयास निश्चित रूप से निर्यातकों के हित में सकारात्मक साबित होगा।

उद्योग-सरकार के बीच संवाद जरूरी : राजीव बंसल 

आईआईए के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट राजीव बंसल ने कहा कि एमएसएमई निर्यात क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने के लिए उद्योग और सरकार के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है। ऐसी बैठकें ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के साथ-साथ निर्यातकों की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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