यूनिफाइड रेगुलेशन 2025, बढ़े शुल्क, श्रमिक मामला और औद्योगिक नीतियों में बदलाव को लेकर उद्योग आयुक्त से निर्णायक वार्ता
हैलो हिन्द
लखनऊ/नोएडा। नोएडा के औद्योगिक हितों को लेकर शुक्रवार को लखनऊ सचिवालय में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बैठक हुई, जहां नोएडा एंटरप्रिनियर्स एसोसिएशन (एनईए) के अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार के समक्ष 16 सूत्रीय मांगपत्र रखकर उद्योगों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर जोरदार पैरवी की।
बैठक में यूनिफाइड रेगुलेशन 2025 के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए उद्यमियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ, ट्रांसफर शुल्क में भारी बढ़ोतरी, समयवृद्धि शुल्क, लीज रेंट, CIC शुल्क, 10B नोटिस, श्रमिक वेतन भार और औद्योगिक भूखंड नियमों में राहत की मांग उठाई गई।

10B नोटिस और कमेटी व्यवस्था खत्म करने की मांग
एनईए ने धारा 10B के तहत बार-बार मामलों को कमेटी में भेजे जाने पर आपत्ति जताते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल करने और औद्योगिक विभाग के ओएसडी स्तर पर निस्तारण की मांग रखी।
ट्रांसफर फीस में 250% बढ़ोतरी पर कड़ा विरोध
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत किए गए ट्रांसफर शुल्क से उद्योगों पर असहनीय बोझ पड़ेगा। इसे वापस लेने की मांग की गई।
5 साल की समयसीमा पर सवाल, मांगा अतिरिक्त समय
नई नीति में औद्योगिक भूखंड को कार्यशील बनाने के लिए 11 साल की बजाय 5 साल की सीमा तय किए जाने पर एनईए ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए 2 वर्ष अतिरिक्त समय देने का प्रस्ताव रखा।
जुर्माना, समयवृद्धि शुल्क और लीज रेंट पर राहत की मांग
डायरेक्टर/शेयर होल्डिंग बदलाव पर ₹500 प्रतिदिन जुर्माना घटाकर ₹100 करने, समयवृद्धि शुल्क पुरानी नीति के अनुसार रखने और ई-नीलामी के बाद बढ़े लीज रेंट को प्रति वर्गमीटर आधार पर तय करने की मांग भी रखी गई।
एलएलपी परिवर्तन पर CIC शुल्क हटाने की पैरवी
प्राइवेट लिमिटेड से एलएलपी परिवर्तन को वैधानिक बदलाव बताते हुए इस पर CIC शुल्क और CIC डीड की अनिवार्यता समाप्त करने का आग्रह किया गया।
श्रमिकों के लिए अटल रसोई, गैस और सरकारी अस्पताल की मांग
एनईए ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में 50 अटल रसोई, छोटे गैस सिलेंडर की उपलब्धता और सरकारी अस्पतालों के लिए भूखंड आवंटन की मांग भी प्रमुखता से उठाई।
वेतन वृद्धि से बढ़े बोझ पर 15% प्रोत्साहन राशि की मांग
21 प्रतिशत वेतन वृद्धि और बढ़ी लागत के बीच उद्योगों को 12 माह तक 15 प्रतिशत राहत/प्रोत्साहन राशि देने की मांग रखी गई। साथ ही श्रमिकों के हिस्से का पीएफ और ईएसआई वेतन से न काटने का सुझाव दिया गया।
कार्यशील प्रमाणपत्र और बिल्डिंग बायलॉज में राहत का मुद्दा भी उठा
पुरानी कार्यशील इकाइयों पर जुर्माना न लगाने और 1000 वर्गमीटर तक के भूखंडों के लिए बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन की मांग भी प्रतिनिधिमंडल ने रखी।
उद्योग आयुक्त ने कहा मांगें उचित, होगा विचार
औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि उद्यमियों की मांगें उचित हैं। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को बुलाकर इन पर कार्रवाई और नीतिगत स्तर पर विचार का आश्वासन दिया।
बैठक में एनईए अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश कोहली और उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव मौजूद रहे।


