दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की शिव कथा में विवाह प्रसंग ने बांधा समां, कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने जीव-परमात्मा मिलन का दिया संदेश
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नोएडा, 25 अप्रैल। सेक्टर-21A स्थित नोएडा स्टेडियम के रामलीला ग्राउंड में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्री शिव कथा के पांचवें दिन शिव-पार्वती विवाहोत्सव का प्रसंग श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुआ। भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग के मंचन और कथा वर्णन ने पूरे पंडाल को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।

को कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश युवा व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष विकास जैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ प्रदेश उपाध्यक्ष निखिल अग्रवाल, क्रॉकरी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश जिंदल और उद्योग प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष अमित गोयल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने शिव-पार्वती विवाह के आध्यात्मिक रहस्यों को बताते हुए कहा कि माता पार्वती जीवात्मा और भगवान शिव परमात्मा के प्रतीक हैं। उन्होंने समझाया कि जैसे नारद जी ने गुरु बनकर पार्वती को शिव प्राप्ति का मार्ग दिखाया, वैसे ही पूर्ण सद्गुरु ही आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। उनके इस संदेश ने श्रोताओं को गहन आध्यात्मिक चिंतन की ओर प्रेरित किया।

कथा के दौरान भारतीय संस्कृति में गौ-सेवा और गोदान की महिमा भी विशेष रूप से प्रतिपादित की गई। डॉ. सर्वेश्वर जी ने कहा कि शुद्ध देसी गाय भारतीय परंपरा और संस्कृति की आत्मा है। उन्होंने महाराज हिमवान के गोदान प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि गोवंश से श्रेष्ठ कोई दान नहीं माना गया।
संस्थान द्वारा संचालित ‘कामधेनु’ प्रकल्प की जानकारी देते हुए बताया गया कि दिल्ली, बिहार, पंजाब और महाराष्ट्र में साहीवाल, थारपारकर और गिर जैसी देसी नस्लों के संरक्षण के लिए गौशालाएं संचालित की जा रही हैं। इस पहल को उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों ने सराहा।

मुख्य अतिथियों ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों की प्रशंसा करते हुए इसे समाज जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
कार्यक्रम के समापन पर वाद्य-वृंदों द्वारा गौ-माता की महिमा में प्रस्तुत वंदन गीतों ने वातावरण को और भावपूर्ण बना दिया। भजनों और वंदन गीतों के बीच पूरा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।

शिव कथा में विवाहोत्सव का यह दिव्य प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत अनुभव बन गया।


